किताबों में अल्फ़ाज़ों में,
कुछ तुझसे इश्क़ के ख्वाबों में,
तेरे करीब होने के ख्यालों में,
खोया रहता हूँ, रमा रहता हूँ।

दिल में तू है रूह में तू है,
खिड़की से बहती हवा में तू है,
समां में तू है आसमाँ में तू है,
इन बरसाती बूंदों की छम छम में तू है,
मौसुम में तू है हर कसम में तू है,
दवा में तू है दुआ में तू है,
और है बसी मेरे तन मन में तू।

तुझसे दिल्लगी के सपने सजाये,
तेरी खुशबू में सना रहता हूँ,
तेरे नशे का सुरूर बनाये,
खोया रहता हूँ, रमा रहता हूँ।।

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