दूरियांँ दूर नहीं, एक आवाज़ की जरुरत है,
मंज़िल ओझल नहीं, एक परवाज़ की जरुरत है,
वक़्त रहते अपनी गूँज से चेतन ज़माना कर दो,
वरना बाजार भरे इस माहोल में शोर भी काफी है।।

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