जगह क्या बताएं तम्हे इंतज़ार की,
हम तो खुद ही भटकते मुसाफिर हैं,
दुआ भी किससे करें तम्हे पाने की,
इश्क़ की बंदगी करते हैं, हम काफ़िर हैं||

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