कब तक फिरता रहे तेरा मुरीद यूँ तन्हा, अपने जज़्बातों को आँखों में लिए,
भेज देना तुम ही किसी को ऐ ख़ुदा, कोई जो इन दिल की दरारों का इलाज जनता हो।।

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