तुम्हारी परेशानियों की वजह बनाकर भेजा है वक़्त ने मुझको,
मैं ही गुम हो जाता हूँ उन वीरानों में कहीं,
शायद, तुम्हारी कुछ तकलीफें कम हो जाएँ।।

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